तुम्हारा फैसला होगा...
कितनी कुरबत होगी, कितना फासला होगा,
जो भी होगा इस रिश्ते में अब तेरा फैसला होगा.
बेहतर होगा न जिक्र करो फुरकत की वजहों का,
खामखा लफ्जो के छिन्टोसे तेरा दामन मैला होगा.
जो भी होगा इस रिश्ते में अब तेरा फैसला होगा.
मुझको पता है कुछ लफ्ज मेरे तुझको रुला रुला देंगे,
अब तक शायद जिनसे दिल थोड़ा बहोत बहला होगा.
जो भी होगा इस रिश्ते में अब तेरा फैसला होगा.
झूटी हँसी ने छुपा लिए होंगे कुछ दर्द भी तेरे,
आँखों का काजल पर कुछ तो फैला होगा.
जो भी होगा इस रिश्ते में अब तेरा फैसला होगा.
रातभर महकते रहे तेरी खुशबू से मेरे ख्वाब,
शाख-इ-नाउम्मीद पे कोई अरमान खीला होगा.
जो भी होगा इस रिश्ते में अब तेरा फैसला होगा.