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Friday, 15 June 2012

Triveni : While Playing With Kapil......

उनको बड़ी शिकायत रहा करती थी मेरे रवैय्ये से,
बड़ी तहजीब पसंद थी वो, और मै बेफिक्र, अल्हड.

मिजाज़ बदल गया है मेरा, इरादा उनका बदलेगा कभी?
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उसके साथ कई रिश्ते रहे मेरे,
दोस्त बने, फिर इश्क हुआ, अब फकत जान पहचान है.

लिबास का रंग फीका पड़ता है वक़्त के साथ.

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मैंने वो हर चीज़ जो सीखी है.
सलीके से करता हु,

कम्बक्त! कोई इश्क क्यों नहीं सिखाता?
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उसने आखरी ख़त में अपना नाम लिखा था निचे,
पर सिर्फ नाम था "सिर्फ तुम्हारी" लिखना भूल गयी थी शायद.

बड़ा सलीका था उसमे, मर्ज भी लिफाफे में भेजा.

Tuesday, 28 June 2011

त्रिवेणी

कुछ तस्वीरे निकाल ली थी उसने एल्बम से,
बहोत प्यार से खिचवाई थी कभी हमने,

काश कुछ पन्ने ज़िन्दगी के भी निकाल पाते हमेशा के लिए.

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तुमने जाते हुए मुस्कुराकर देखा था मेरी ओर,
लगा था तुम जरुर लौटकर आओगी.

यकीन नहीं होता एक मजाक क्या क्या कर सकता है.

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पहले इन्ही बातो में दिन गुजारा करते थे हम दोनों,
अब वो सारी बेमतलब की बाते फिजूल लगती है.

कुछ मेरी नजर बदलती गयी कुछ तुम चेहरे बदलते गए.

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Friday, 13 May 2011

त्रिवेणी :


बस उसने हाथ छुड़ाया और चली गयी
फिर कभी मुड़कर नहीं देखा मुझको.

उम्र कितनी ही लम्बी हो मौत हिचकी भर का वक़्त लगता है.

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चाँद सहमा हुआ था कल रात,
सारे शहर में सन्नाटा था.

मेरे लिए दोनों जहाँ थी वो.
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कल देर तलक बैठा रहा उसके पास,
न उसने मुझे पहचाना, न मैंने उसको.

ख्वाब कभी कभार हकीकत बयां करते है.
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