कुछ शिद्दत भी हो मिलने की
कुछ शिद्दत भी हो मिलने की, और मुफीद हालात भी हो,
नजरो की कुछ शर्म घटे तो दिल से दिल की बात भी हो.
लफ्जो की जरुरत कतई नहीं है, लुत्फ़ भी कम हो जायेगा.
शर्म-ओ-हया हो, डर हो थोडा, कुछ ऐसे तालुकात भी हो.
नजरो की कुछ शर्म घटे तो दिल से दिल की बात भी हो.
बंदिशे तू तोड़ जरा, कुछ इश्क को भी इतराने दे,
उलझे उलझे दिन गुजरे कुछ बहकी बहकी रात भी हो.
नजरो की कुछ शर्म घटे तो दिल से दिल की बात भी हो.