Sunday, 1 November 2026

क़िरदार

कहानी के क़िरदार नहीं, किरदारों की कहानी देख।
लोगो के चेहरे को पढ़, फिर तासुरों के मानी देख।

नायक को नायक बाक़ी के सब किरदार बनाते है,
भक्ति भरत की, प्रेम लखन का, सीता की कुर्बानी देख।
लोगो के चेहरे को पढ़, फिर तासुरों के मानी देख।

दोनों ही सूरत में अर्जुन, लड़ना तो आखिर है तुमको,
या अपना इमां ओ ज़मीर या फिर तर्फ ए सानी देख।
लोगो के चेहरे को पढ़, फिर तासुरों के मानी देख।

उसके लब, बातें उसकी हाल कहेगी अच्छा है,
तेरी ज़िम्मेदारी है तू आंखे और पेशानी देख।
लोगो के चेहरे को पढ़, फिर तासुरों के मानी देख।

रेगिस्ता हो या कि समंदर दोनों बदौलत पानी के,
इतना ज़ोरावर है फिर भी कितना नर्म है पानी देख।
लोगो के चेहरे को पढ़, फिर तासुरों के मानी देख।

मूंद ले आंखे, डूब के भीतर, लाज़वाल हस्ती को छू,
खोल के आंखे शीशे में फिर ये जिस्म ए फ़ानी देख।
लोगो के चेहरे को पढ़, फिर तासुरों के मानी देख।

तेरा तकब्बुर, तेरे शेखी सबब है सारी झंझट का,
उसके हवाले सौंप दे खुदको और 'शफ़क़' आसानी देख।
लोगो के चेहरे को पढ़, फिर तासुरों के मानी देख।