क्यों उम्मीद करू आसां हो सफर मेरा।
मै चिराग़ हूं, जलना है मुकद्दर मेरा।
इलाज ए मर्ज़ नहीं, बस दवा ए राहत हूं,
उतर जाएगा कुछ देर में असर मेरा।
मै चिराग़ हूं, जलना है मुकद्दर मेरा।
ये तुफां ए समंदर से निपट लूं फिर भी,
ले डूबेगा मुझको खामखां डर मेरा।
मै चिराग़ हूं, जलना है मुकद्दर मेरा।
हर सवाल पे उसके मै मुस्कुराता रहा,
लहज़ा पहले से रहा है मुख्तसर मेरा।
मै चिराग़ हूं, जलना है मुकद्दर मेरा।
खामोशियां, उदासियां, बेरंग समा,
मेरे जैसा ही लगता है ये घर मेरा।
मै चिराग़ हूं, जलना है मुकद्दर मेरा।