Kuchh Adure Khayal........
कुछ ख्वाब अधूरे छोड़ आया, कुछ किस्से पुराने छोड़ आया,
उस कमरे की तन्हाई में कितने ज़माने छोड़ आया.
अब तो दिन का सूरज थक कर पैमाने में डूबा है,
वहा अधूरी नज्मो में लाखो मयखाने छोड़ आया.
उस कमरे की तन्हाई में कितने ज़माने छोड़ आया.
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आँख खुली और सिरहाने में तेरे अधूरे ख्वाब मिले,
सहर आइना देखा तो आँखों में महताब मिले.
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ये शाम यु ही फैली रहने दो, रात तलक मत जाने दो,
मध्हम सूरज की बाहों में धुंधला सा चाँद इतराने दो.
ढलती किरने सूरज की जो चाँद का चेहरा छू लेंगी,
सावले चाँद को पहले इश्क में थोडा तो शरमाने दो.
मध्हम सूरज की बाहों में धुंधला सा चाँद इतराने दो.
कई ज़माने से देखा है जलते बिलखते सूरज को,
आज के दिन बस चाँद की रुई से जख्म इसे सहलाने दो.
मध्हम सूरज की बाहों में धुंधला सा चाँद इतराने दो.
Kuchh khayal adhure rah jate hai, kuchh khushiya bhi aur kuchh lamhe bhi par wo pure jarur hote hai kisi din achanak jab shayad unke pura hone ki ummid bhi nahi rahti....